सिल्लाखेड़ी रेलवे हाल्ट के समीप अधर मे लटका रेल अंडरपास का निर्माण।
HARYANA SAFIDON VS NEWS INDIA

लुदाना के बाद सिल्लाखेड़ी रेल अंडरपास का विवाद गहराया

VS News India | Reporter – Sanju | Safidon : – गोहाना-जींद रेल शाखा के लुदाना अंडरपास को लेकर ग्रामीणों द्वारा दो सप्ताह तक चलाए गए आंदोलन के बाद भी विवाद पूर्णतया: निपट नहीं पाया है। जहां ओवरब्रिज या फाटक बनाने के लिए ग्रामीणों ने रेल प्रशासन को 25 अप्रैल तक का समय दिया हुआ है। इधर जींद-पानीपत रेल शाखा के सिल्लाखेेड़ी हाल्ट के समीपवर्ती रेल अंडरपास का विवाद भी नहीं निपटा है। सफीदों उपमंडल के गांव बहादुरगढ़ के विजय कुमार ने इस अंडरपास के निर्माण को लेकर एक दावा सफीदों के सिविल जज (जूनियर डिवीजन) की अदालत मे दायर किया था, जिसमें सिविल जज सर्वप्रीत कौर ने विवाद की जगह यथास्थिति बनाए का आदेश दोनों पक्षों को जारी किया था। विकास ने दायर मामले में कहा है कि बिना सही निशानदेही कराए इस अंडरपास के निर्माण के ठेकेदार व संबंधित रेल अधिकारियों ने उसकी निजी जमीन के एक हिस्से में अंडरपास का निर्माण कर दिया। इस अदालत मामले में विकास के वकील बलिंद्र बैरागी ने बताया कि उन्होंने इस मामले में उत्तर रेलवे के महाप्रबंधक, रेल के पानीपत में सहायक अभियंता व अंडरपास के ठेकेदार बलराम को पार्टी बनाया हुआ है। विकास ने बताया कि वैसे भी अंडरपास के उत्तरी हिस्से में 20 फुट से भी कम चौड़ा रास्ता पक्का किया गया है, जबकि इस रास्ते की चौड़ाई साढ़े 27 फुट है और इसके निर्माण में कई फुट उसकी निजी जमीन की पट्टी निर्माण में शामिल कर ली गई है। इसके क्षेत्राधिकार के सहायक अभियंता पानीपत आरडी कल्याण ने बताया कि डेढ़ फुट जमीन पर वादी दावा कर रहा है। उन्होंने बताया कि अंडरपास के निर्माण मे केवल रास्ते को चद्दरों से कवर करने का काम रूका है और वह अदालत के आदेश के कारण नहीं बल्कि बिजली लाइन के कारण है जिस बारे संबंधित उपमंडल अभियंता ने कहा है कि वे अंडरपास के ऊपर से बिजली लाइन के जल्द हटा लेंगे। बता दें कि अदालत के यथास्थिति के आदेश के बाद अंडरपास के रास्ते को चद्दरों से ढ़कने का काम रूक गया है, जिसके कारण बारिश होने पर पानी अंडरपास में जमा हो जाता है जिसकी निकासी की भी समुचित व्यवस्था ठेकेदार ने नहीं की है। इसके रास्ते को सफीदों-जींद स्टेट हाईवे से लिंक करने का काम भी लटका है, क्योंकि इस रास्ते को पक्का करने को उत्तरदायी मार्किटिंग बोर्ड के अधिकारियों का कतई ध्यान नहीं हैं और रास्ते की जमीन पर अवैध कब्जा होने के कारण लोगों का आवागमन मुश्किल हो रहा है।

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