HARYANA SAFIDON VS NEWS INDIA

केंद्र सरकार द्वारा किए जा रहे अत्याचारो ने अंग्रेजी हुकूमत की दिला दी याद

VS News India |Reporter – Sanju | Safidon : – पूर्व सांसद एवं पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अशोक तंवर ने कहा कि तीनों कृषि कानूनों को वापिस लेने की मांग को लेकर दिल्ली की सीमाओं पर धरना-प्रदर्शन कर रहे किसानों के ऊपर केंद्र सरकार द्वारा किए जा रहे अम्त्याचारों ने अंग्रेजी हुकूमत की याद दिला दी है। ये शब्द उन्होंने सफीदों में पत्रकारोंसे बातचीत में कहा कि स्वतंत्रता संग्राम में अपने ऊपर हो रहे जुल्मों से तंग आकर देश के लोगों और स्वतंत्रता सेनानियों ने अंग्रेजों को भारत से खदेड़ दिया था। अगर सरकार ने तीनों कृषि कानून वापिस नहीं लिए तो मौजूदा सरकार का भी अंग्रेजों जैसा हाल होने वाला है।
उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा लागू किए गए ये तीनों कानून इस देश के किसानों को कतई मंजूर नहीं है। सोई हुई सरकार को जगाने के लिए किसान इस कड़ाके की ठंड में धरना देने को मजबूर है। अनेकों अत्याचारों के बावजूद देश के किसान के हौसले बुलंद हैं। उन्होंने कहा कि कृषि कानूनों के विरोध में अभी एक ही विधायक का इस्तीफा हुआ है। अभी ओर विधायकों व सांसदों के द्वारा इस्तीफा दिए जाने की आवश्यकता है तभी सरकार पर दबाव बनेगा। भाजपा सरकार के मंत्री, विधायक व सांसद बेशर्मी के साथ कुर्सी पर चिपके हुए है और उन्ह किसानों की तकलीफों से कोई सरोकार नहीं है। लाल किले मामले में तंवर ने कहा कि लाल किले पर सबसे ऊंचा उस समय भी और आज भी देश की शान तिरंगा बड़ी ही शान से लहरा रहा है। इस मामले में सरकार अनाप-शनाप प्रख्चार कर रही है। कुछ उत्साही युवाओं ने वहां पर कोई देशविरोधी झंडा नहीं बल्कि सिर्फ एक धर्म का झंडा फहराया है। उन्होंने कहा कि सरकार को चाहिए कि वह इस मामले को पूरी संवेदनशीलता के साथ हैंडल करें। सरकार बजट सत्र के दौरान पहले इन तीनों कानूनों को वापिस ले फिर इन कानूनों के बारे में किसानों को समझाएं। अगर किसानों कोकानून अच्छे लगे तो उन्हें फिर से लागू करें। इस मसले में संवेदनशीलता बरतने की बजाए कृषि मंत्री संसद में बहस के दौरान इन कानूनों को किसान हित में बतला रहे हैं। सरकार इस कदर सत्ता के नशे में चूर है कि वह लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पत्रकारों को जेलों में डाला जा रहा है। उन्होंने कहा कि सफीदों क्षेत्र में अनेक प्रकार की समस्याएं मुंह बाए खड़ी है लेकिन सरकार इन समस्याओं के निराकरण में कतई रुचि नहीं रखती। सफीदों का ऐतिहासिक खानसर चौंक पिछले कई वर्षों से बहुत बुरी दशा में है और इसका निर्माण कार्य कछुआ चाल चल रहा है। परेशान नागरिकों ने 15 फरवरी को धरना देने का ऐलान किया है। उन्होंने सरकार व प्रशासन को चेताते हुए कहा कि अगर 15 फरवरी तक सड़क का निर्माण नहीं हुआ तो वे भी इस दिन लोगों के साथ धरने पर बैठेंगे।

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