सफीदों में सफीदों बचाओ संघर्ष समिति के आह्वïान बुलाई गई बैठक। 
HARYANA SAFIDON VS NEWS INDIA

गोहाना जिला बनने से पहले ही, कही गोहाना में न मिल जाए सफीदों, सताने लगा है डर 

VS News India | Reporter – Sanju | Safidon : – प्रदेश सरकार द्वारा गोहाना को जिला बनाए जाने के प्रस्ताव को लेकर सफीदों को भी जिला बनाए जाने की मांग उठ खड़ी हुई है। इसके अलावा यहां के  लोगों को यह भी डर सता रहा है कि कहीं सफीदों विधानसभा को जींद जिला से निकालकर संभावित गोहाना जिला में ना शामिल कर दिया जाए। 
इस संबंध में नगर के प्रबुद्धजनों की एक बैठक सफीदों बचाओ संघर्ष समिति के चेयरमैन एवं पूर्व नपा प्रधान मनोज दीवान के कार्यालय में संपन्न हुई। इस  बैठक में मुख्य वक्ताओं में शामिल मनोज दीवान, समाजसेवी अरुण खर्ब, एडवोकेट सियाराम भारद्वाज, प्रमोद जैन, गूगा सैनी, डा.रामचंद्र माटा,  विश्व हिंदू परिषद के जिला उपाध्यक्ष अरविंद्र शर्मा, गजे सिंह पंडिर ने अपने विचार रखते हुए कहा कि गोहाना को बेशक जिला बनाया जाए, लेकिन उससे  पहले जिला बनने का हक सफीदों का है। सफीदों से पहले गोहाना को जिला बनाया जाने का निर्णय कतई न्यायसंगत नहीं है।  अगर गोहाना को सफीदों की बजाए पहले जिला बनाया जाता है तो यह सफीदों विधानसभा के लोगोंं के साथ बहुत बड़ी ज्यादती होगी।  क्योंकि सफीदों एक ऐतिहासिक नगरी है तथा इसका महाभारत कालीन सभ्यता में विस्तृत वर्णन है। सफीदों भौगोलिक रूप से रमणीक व सुंदर है तथा पूरे  देश में वाणिज्य व व्यापार का बहुत बड़ा केंद्र है। 
फिर भी सरकार गोहाना तहसील को जिला बनाने पर पूरा जोर लगा रही है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार को प्रदेेश में कोई नया जिला बनाना ही है तो  गोहाना से पहले पुरातन नगरी सफीदों को जिला बनाया जाए। उन्होंने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि सरकार को गोहाना तहसील को जिले का दर्जा  दिए जाने व सफीदों को उसमें शामिल किए जाने की मंशा बहुत महंगी पड़ सकती है। सफीदों को जिला बनवाने के लिए बच्चा-बच्चा बड़ी से बड़ी कुर्बानी  देने को तैयार है।  सफीदों की जनता सरकार की इस राजनीतिक चाल को कभी भी पूरी नहीं होने देगी। उन्होंनेे कहा कि सफीदों की जनता बेहद जागरूक है। यहां की 
जागरूक जनता के साथ कोई भी सरकार अपने निर्णय धक्के से नहीं थोप सकती है। उन्होंने कहा कि सरकार सफीदों को लावारिस ना समझकर अपने 
निर्णय को वापिस ले ले, अन्यथा उसको गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। सफीदों की जनता इस मामले में बड़े से बड़े आंदोलन के लिए बिल्कुल तैयार है। 
इस मसले पर कोई भी अनहोनी घटता घटती है तो उसकी सारी जिम्मेदारी सरकार की होगी। 
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पहले भी हुआ था आंदोलन
उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व भ्भी वर्ष 2009 व 2016 में गोहाना को जिला बनाए जाने और सफीदों विधानसभा को गोहाना जिला में शामिल किए जाने की 
बात उठी थी। उस वक्त भी यहां के लोग आक्रोशित हुए थे। इस मामले में अनेक बैठकें हुई थी और सरकार व प्रशासन को ज्ञापन सौंपे गए थे। 
इसके अलावा तत्कालीन मुख्यमंत्री का पुतला भी फूंका गया था और सफीदों बचाओ संघर्ष समिति के आह्वïान पर सफीदों बंद भी किया 
गया था। उस वक्त यह बात दब गई थी, लेकिन अब फिर से यह बात उठ खड़ी हुई और जिसकों लेकर यहां के लोग लामबंद हो गए हैं। इस मौके पर 
मुख्य रूप से सुखदेव राणा, सुशील गुर्जर, जस्सा रविदासियां, सुरज बाल्मीकि, जयभगवान कुंडू पिल्लूखेड़ा, अजय कुश, सुनील चावला, ईश्वर रैबारी सहित काफी तादाद में लोग मौजूद थे।
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सफीदों को गोहाना में शामिल किया गया तो वह किसी भ्भ्भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं होगा। सफीदों ऐतिहासिक नगरी होने के साथ-साथ हर लिहाज से गोहाना से सुविधाओं में आगे है। इसलिए गोहाना के साथ-साथ सफीदों को भी जिला बनाया जाए। यदि सफीदों डिवीजन को गोहाना में शामिल करने का प्रयास किया तो वह के लोगों के साथ मिलकर आंदोलन करेंगे। …. सुभ्भाष गांगोली, विधायक सफीदों। 
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सफीदों का हक पहले
सफीदों को जिला बनाना समय की मांग है। गोहाना से पहले सफीदों का हक बनता है। यहां की जनता की भी यहीं मांग है और मै भ्भी लंबे समय से इसकी मांग कर रहा हूं। …. जसबीर देशवाल, पूर्व विधायक सफीदों 

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