गांव मुआना के राजकीय स्कूल में बिना मास्क व सामाजिक दूरी के खड़े बच्चें।
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अनलॉक में सरकार के आदेशों की राजकीय स्कूल के अध्यापक उड़ा रहे धज्जियां, बिना मास्क के सैकड़ों छात्राओं को बुलाया स्कूल

VS News India | Reporter – Sanju | Safidon : – गांव मुआना में सरकारी स्कूल के अध्यापकों द्वारा सरकार के आदेशों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। अनलॉक के चलते भी सरकारी स्कूल में बच्चों को बुलाया जा रहा है। सफीदों खंड के गांव मुआना के राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में सोमवार को छोटे बच्चों के साथ 80-85 छात्राएं स्कूल में उपस्थित मिली। जिसमें सभी बच्चे बिना मास्क के स्कूल में प्रवेश के डॉक्यूमेंटस जमा करवाते नजर आए। मामला मीडिया के संज्ञान में आते की डीईओ डा. नरेश वर्मा ने फोन पर बात कर अध्यापकों को फटकार लगाई तो, अध्यापकों ने तुरंत बच्चों को वापस घर भेज दिया। ऐसे में आज-कल निजी स्कूल व सरकारी स्कूल में फिलहाल ऐडमिशन अधिक से अधिक करने का दौर जारी है। साथ ही इस महामारी के दौर में छूटे रोजगार के कारण भिभावकोंभी कही-ना-कही बच्चों के ऐडमिशन के लिए सरकारी स्कूलों की ओर रुख कर रहें है।  इसी कारण सोमवार को गांव मुआना  के राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय का नजारा कुछ और ही था। स्कूल में करीब 85 छात्राएं स्कूल में बिना मास्क के दिखाई दी। छात्राओं का कहना था कि उन्हें अध्यापकों द्वारा ऐडमिशन करने के लिए दस्तावेजों के साथ बुलाया गया था। स्टाफ द्वारा छात्राओं की कोई सोशल डिस्टेंसिंग नहीं बनवाई गई थी और साथ ही जो अध्यापक छात्राओं के डॉक्यूमेंटस जमा कर रहा है वह भी मास्क नहीं लगाए हुआ था। 
कुछ ग्रामीणों के विरोध के बाद जैसे ही स्कूल लगने का मामला मीडिया के संज्ञान में आया तो मीडिया कर्मियों तुरंत मौके पर पहुंचे और तभी अध्यापकों 

मीडिया के पहुंचने के बाद अध्यापकों द्वारा वापिस भेजे गए बच्चे। 

प्राइमरी स्कूल में बच्चों के साथ स्कूल आ रही छात्राओं को भगा दिया। स्कूल में उपस्थित स्टाफ के सदस्यों का कहना था कि किताबें वितरित करने के 
लिए बच्चों को बुलाया गया था। जबकि छात्रों का कहा कहना था कि उन्हें डोकोमेंट्स के साथ अगली कक्षा में दाखिला करने के लिए बुलाया गया था। 
जानकारी के अनुसार इस स्कूल में 11वीं कक्षा बैठनी थी, अध्यापकों ने 10वीं का परीक्षा परिणाम घोषित होने की सूचना पर, 10वीं छात्राओं को बुलाया 
गया, ताकि पास होने वाली उन लड़कियों का स्कूल में दाखिल किया जा सकें। 
इस मामले में स्कूल के इंचार्ज अजय कुमार का क्या कहना है कि किताब वितरित करने के लिए बच्चों को बुलाया गया था। उनका कक्षाएं लगाने का कोई मकसद नहीं है। बच्चे कम संख्या में बुलाया गए थे, लेकिन अधिक बच्चे गलती से पहुंच गए। उन्हें सोशल डिस्टेंस रखने के लिए बोला गया था, बच्चे नहीं माने। अध्यापक ने कहा कि उन्होंने पहली और 11वीं के बच्चों को ही बुलाया गया था। 
वहीं इस मामले में जब सफीदों खंड शिक्षा अधिकारी डॉ. नरेश वर्मा से बात की गई तो उन्होंने कहा कि मामला जैसे ही उनके संज्ञान में आया तो, उन्होंने तुरंत स्टाफ को बोल कर बच्चों को वापस भेजने के आदेश दे दिए थे। सरकार के आदेश है कि स्कूल में तीन-चार बच्चों को सिर्फ किताबें वितरित कर सकतेे है। जोकि मास्क व सामाजिक दूरी बनाए रखेंगे। बच्चे अधिक होने का कारण यह भ्भी रहा कि सरकार द्वारा 10वीं के रिजल्ट घोषित होने की सूचना के बाद रिजल्ट जानने के लिए गलती से बच्चे स्कूल पहुंच गए होंगे। इसके अलावा उन्होंने कहा है तीसरी, सातवीं व आठवीं कक्षा की किताबें आई हुई थी,अध्यापकों ने बच्चों को किताबों को वितरित के लिए बुलाया था। 
मामला मेरे संज्ञान में नहीं है, जल्द ही जानकारी जुटाकर मामले में जांच की जाऐंगी। अगर किसी की गलती पाई जाती है तो कानूनी कार्रवाई के आदेश दिए जाऐंगे। ………मनदीप कुमार, एसडीएम सफीदों
स्टाफ ने अगर ऐसा किया है, तो गलती है। मामला फिलहाल मेरे भी संज्ञान में नहीं है। आज सभी को कोरोना महामारी से बचने के लिए सरकार के आदेशों की पालना करनी चाहिए। कोई छात्र बिना मास्क के नहीं बुलाना था और ना ही भीड़ एकत्रित होने देनी चाहिए। वह भी मामले में अधिकारियों से बात करेंंगे। …..अमरपाल राणा, भाजपा जिलाध्यक्ष

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