सफीदों मंडी में तुलाई का काम शुरू करते हुए किसान।
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आढ़तियों में एकता नहीं बनने के कारण हड़ताल हुई समाप्त

VS News India | Reporter – Sanju | Safidon : – शहर की नई अनाज मंडी के कच्चा आढ़ती संघ के नवनियुक्त प्रधान ने हड़ताल में शामिल नहीं होने वाले 15 आढ़तियों 21-21 हजार रुपए का जुर्माना लगाने का अजीबोगरीब फरमान जारी कर दिया। लेकिन अभी-तक एक भी आढ़ती ने कोई पैसे जमा नहीं करवाया गया। संघ के आढ़तियों में एकता नहीं बनी,तो शुक्रवार को आढ़तियों ने दोपहर के समय हड़ताल को भी वापिस ले लिया है। हालांकि 8 अप्रैल को भी 15 आढ़तियों द्वारा करीब 18 हजार क्विंटल गेहंू की खरीद की गई।

जिन से परेशान होकर ही नवनियुक्त प्रधान पाला राठी ने 21-21 हजार रुपए का जुर्माना लगाने का निर्णय लिया था। शुक्रवार बैठक कर सभी आढ़तियों ने अपनी हड़ताल को वापिस ले लिया है। कच्चा आढ़ती संघ के प्रधान पाला राठी ने कहा कि वीरवार को हड़ताल की गई थी, कि 5 अप्रैल को करनाल में हुई राज्य स्तरीय कार्यकारिणी की बैठक में हरियाणा की मंडियों के सभी प्रधानों ने सरकार को अल्टीमेटम दिया था, कि अगर 7 अप्रैल तक आढ़तियों की मांगें नहीं मानी जाती तो 8 अप्रैल से कोई भी आढ़ती, मुनीम व मजदूर सरकार के लिए गेहूं का कार्य नहीं करेगा। प्रदेश कार्यकारिणी के आह्वान के मद्देनजर सफीदों मंडी के आढ़तियों ने वर्क सस्पैंड रखा था। लेकिन करीब 15 आढ़तियोंं ने हड़ताल के दौरान भी गेहूं की खरीद की। संघ के सदस्यों से सलाह कर ही 21-21 हजार रुपए जुर्माना लगाया गया था। अब- आढ़तियों की फूट के कारण ही हड़ताल को
समाप्त कर दिया गया है।

प्रधान पाला राठभ्ी के अनुसार सरकार से मांग थी कि किसानों की पेमेंट आढ़तियों के माध्यम से होनी चाहिए, आढ़ती से भराई में प्रयोग आने वाले बारदानें पर कोई मार्का नहीं लगवाया जाए, सीजन में जे फार्म की लेबर जे फार्म में से काटी जाए, धान के सीजन की लोडिंग की लेबर का तत्काल भुगतान करवाया जाए, आढ़ती की दामी सीजन खत्म होने के 15 दिन में दी जाए, मंडी के नजदीक कंडे का तोल ही मान्य हो, बाद के वजन घटने की जिम्मेदारी आढ़ती की नहीं होनी चाहिए, खरीफ 2020 का भुगतान जिस भी गलत खाते में गया है उसे सही खातों में भेजा जाए, रबी 2020 की जो पेमेंट ब्याज के रूप में काटी गई थी उसका भुगतान तत्काल आढ़ती को वापिस किया जाए।

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