गांव पाजूखुर्द में मृतक पड़ी भैंस।
HARYANA SAFIDON Sansani VS NEWS INDIA

पिछले 20 दिनों में गांव पाजूखुर्द में पांच भैंसों की अचानक मौत, तीन किसानों का हुआ लाखों का नुकसान

VS News India | Reporter – Sanju | Safidon : – उपमंडल के गांव पाजूखुर्द में पिछले 20 दिनों में पांच भैंस की मौत हो गई। बुधवार देर सांय भी गांव पाजूखुर्द में पशुपालक वजीर खर्ब की दो भैंसों की  अचालक मौत हो गई। गांव में पशु की मौत होने पर पीडि़त पशुपालकों के साथ किसानों ने एरिया के पशु चिकित्सक डा.बलजीत पर लापरवाही बरतने के  आरोप लगाए है। क्योंकि बीमारी होने पर जब भी डाक्टर को बुलाया जाता है तो वहा कभी भी नहीं आता। छुट्टी पर होने की बात कहकर टाल देता है।  पीडि़त पशु पालक वजीर खर्ब ने कहा कि जिस समय तक उनकी एक भैंस की मौत हुई थी, तो उन्होंने एरिया के पशु चिकित्सक डा. बलजीत के फोन कि या थाख् लेकिन उन्होंने छुट्टी पर होने की बात कही, डाक्टर ने किसी दूसरे डाक्टर को भी फोन करना उचित नहीं समझा। पशु चिकित्सक की लापरवाही के कारण पिछले 20 दिनों में पांच भैंसों की मौत हो चुकी है।

गांव पाजूखुर्द में मृतक पड़ी भैंस।

करीब 15 दिन पहले पशु पालक सोनू पुत्र बिराराम की एक भैंस की मौत और एक भ्भैंस दलबीर पुत्र भीमूराम खर्ब की भी मर चुकी है। पशु पालक कृष्ण की भैंस का काटडू खराब हो चुका है। किसानों को लाखों रुपए का नुकसान आए दिन हो रहा  है। ऐसे में पीडि़त किसानों के आरोप है किसी भी डाक्टर ने एक भी भैंस का पोस्टमार्टम करना उचित नहीं समझा।  पशुपालक वजीर खर्ब, विरेंद्र खर्ब, दलबीर, सोनू आदि के आरोप यह भी है कि गलगोटू-मुंहखूर के टीके डाक्टरों द्वारा मई माह में लगाए गए थे, जो भैंस सात से आठ माह की गर्भवती होती है तो उसे यह टीका नहीं लगाना होता, लेकिन डाक्टर पशुबाड़े में पहुंंचकर या धूप में खड़ी भैंसों को भी टीका लगा देते है। उनका पशु चिकित्सक कभी भी समय पर नहीं आता, जब भी एरिया के डाक्टर बलजीत से पशुओं में कोई बीमारी होने के बाद फोन कर कर कही जाती है तो वह छुट्टी पर होने की बात कह देता हैै। जबकि डाक्टर की ड्यूटी 24 घंटे की होती है, ऐसे में क्या किसी दूसरे डाक्टर की ड्यूटी नहीं लगानी चाहिए। डॉक्टर बलजीत की लापरवाही के कारण की भैंस की आए दिन मौत हो रही है। पाजू खुर्द के पशु में बीमारी फैलने से सभी पशुपालकों में डर बना हुआ है कहीं उनके पशु की भी इस तरह से मौत ना हो जाए। क्योंकि डाक्टरों तो हर वक्त निरादर रहता है। जब एरिया के पशु चिकित्सक डा.बलजीत से बात की गई तो उन्होंने कहा कि ग्रामीणों कभी भी समय पर सूचना नहीं देते हैं। जब उनका पशु मर जाता है तो  तभी उनको सूचना दी जाती है। उनके पास कल सांय को करीब सात बजे फोन आया था, उस समय मै छुट्टी पर था। ग्रामीण उन पर गलत आरोप लगा रहे है। सोनू की भैंस का पोस्टमार्टम करने के लिए वह गए थे, लेकिन उसकी भैंस को बीमा का टैंक तो लगा हुआ था, उसकी तिथि समाप्त हो चुकी थी। उन्होंने  गलगोटू-मुंहखूर का इंजेक्शन अपने एरिया में मई माह में ही पूरे कर दिया था। डॉक्टर बलजीत के आरोप है कि पशु पालक बदतमीजी से बात  करते है। 

अपने पशुओं के साथ पीडित वजीर खर्ब। 

पशुओं की मौत होने के मामले में वरिष्ठ पशु चिकित्सक डा.सुशील रोहिल्ला व डा.बलजीत की भैंस की मौत को कारण जाने के लिए ड्यूटी लगा दी गई है। गलगोटू-मुंहखूर का इंजेक्शन से भैंस की मौत नहीं हो सकती, कुछ समय तक सुजन जरूरी होती है। हो सकता है कि कृषि विभाग की जो दवाईयां प्रयोग की जाती है या फिर गांव में तरह-तरह की दवाईयां का छिड़कवा किया जाता है उन दवाईयों से पशुओं मेें बीमारी हो सकता है। डाक्टर बलजीत कल छुट्टी पर थे, उन्होंने दोनों डाक्टरों की गांव में ड्यूटी लगा दी है। …….राज सिंह चहल,एसडीओ पशु चिकित्सक विभाग सफीदों

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