गांव पाजू खुर्द में संाग के दौरान प्रस्तुती देते कलाकार।
HARYANA SAFIDON VS NEWS INDIA

परिवार एवं रिश्तों पर भारी राजनीति पर प्रेरित राजा धु्रव भगत के हरियाणवीं सांग का ग्रामीणों ने उठाया लुफत

VS News India | Reporter – Sanju | Safidon : – रिश्तों पर भारी राजनीति का प्रतिक राजा ध्रुव भगत का हरियाणवीं सांग शुक्रवार गांव पाजूखुर्द में आयोजित हुआ। वर्ष 1970-80 के बाद से लुप्त हो रही  इस हरियाणा संस्कृति देखने के लिए आस-पास के गांवों से भी सैकड़ों पुरुष व महिलाएं सांग देखने पहुुंची। यह सांग संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार नई  दिल्ली के सौजन्य से सोसाइटी फोर कल्चर एवं सोशल अपलिफ्टमैंट नई दिल्ली द्वारा आयोजित करवाया गया था। कार्यक्रम की अध्यक्षता स्थानीय डीएसपी  चंद्रपाल द्वारा की गई थी। जिसमें आंध्रप्रदेश सरकार के कमीशनर आईएएस जगदीश चंद्र शर्मा ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत की। साथ ही विशिष्ट अतिथि के  रूप में बीईओ डा.नरेश वर्मा, प्राइवेट स्कूल संघ के हल्काध्यक्ष अरुण खर्ब, राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता सुभाष ढिग़ाना उपस्थित रहेंगेे। कार्यक्रम के आयोजक  एवं सोसाइटी के सचिव आन्नद प्रकाश ने बताया कि हमारी हरियाणवीं संस्कृति का सांग अहम हिस्सा है। जोकि आज के दौर में लुफ्त होते जा रहें है।  जिसको बचाने के लिए संस्था समय-समय पर इस प्रकार के कार्यक्रम आयोजित करती रहती है। इसी प्रकार से अब अधिकतर गांव में सांगों का आयोजन  किया जाएगा। गांव पाजूखुर्द में उत्तानपात (राजा धु्रव भगत) हरियाणवीं सांग का मंच सजाया गया था।  जिसमें संक्षिप्त कहानी में दर्शाया गया कि अवधपूरी में राजा ऊतानपात राज करते है। जसकी सनेहगढ़ में रानी सुनीती के साथ शादी होती है। काफी दिन बीत जाने के बाद भी घर में कोई संतान नहीं होती। रानी उदास रहती है और एक दिन नारद जी की बात सुनकर राजा की शादी अपनी छोटी बहन से करवाने की सोचती है, लेकिन राजा ईनकार करता-करता रानी की जिद्द पर आखिर में मान जाता है। राजा बारात लेकर सुनेगढ़ में सरुची से शादी करने पहुंच जाता है। सरूची तीन फेरे लेकर बैठ जाती है। ब्राहम्ण कहते है अभी तो चार फेरे बाकी है। सरूची मैं बाकी फेरे नहीं लुंगी मेरे को राजा चार बचन देगा, तभी फेरे लुंगी। राजा ने कहा कि मांगों, सरूची रानी मांंगती है पहला वचन जो राज पाट में काम होगा मुझसे पूछकर होगा। दूसरा वचन मेरे गर्भ से जो संतान होगी, तेरे बाद राज का मालिक वही होगा। तीसरा वचन मैं सखियों मै बैठी होगी तो आप मुझे उठाओगे नहीं और चौथा वचन जब जी चाहेगी तब मागुगीं वह वचन तेरे पास धरोहर है। राजा सभी वचन मान लेता है। 

अवधपुरी के बागों में आते ही रानी डोली रुकवाती है। राजा से कहती है। चौथा वचन अभी बाकी है। अब वचन लेना हैख्, राजा कहता है रानी घर चलो वहा  ले लेना, रानी कहती है नहीं यही लेना है। चौथे वचन में, रानी कहती है आप अपनी रानी सुनीती को दुहागी महल देंगे, उसका सफेद बाणा होगा, महल के  चारो कौणे पर दही के कुंड़े होंगे, जोकि काग उड़ायेगी। तभी राजा कहता है रानी इतना बड़ा अन्याय मत करो, वो भी तेरी बहन है। सरूची राजा से कहता है आपने ये करना होगा। रानी जब आरता करने के लिए आती है तो सरुची आरता ठुकरा देती है। तभी ताने देते हुए कहती है कि तूने मेरा गला काट कर मेरी शादी बूढ़े से कराई है। गाली-गलोच हो जाती है। बड़ी रानी कहती है महाराज ये जो मांगती है आप दे दो। ये मेरे को दुहाग चाहती है वचन दे दो। महाराज यह वचन भी दे देता है। कुछ दिन बाद राजा शिकार खेलने जाता है। आंधी-तुफान आने पर राजा आंधी – तूफान से बचने के लिए बड़ी रानी के पास रात को रुक जाता है। रात में मिलन से बड़ी रानी को धु्रव पैदा होता है और कुछ दिन के बाद छोटी सरूची को   ऊतम पैदा हुआ। एक दिन ऊतम का जन्म दिन मना रहे प्रजावासी डोल-नगाडे बजा रहे होता है। धु्रव अपनी मां से कहता है मै भी दरबार मैं जाऊंगा।  नही बेटा वहां मत जा, नही मैं जाऊंगा।  

जिद्द करके चला जाता है और जाकर राजा की गोद में बैठ जाता है। राजा कहता है कौन है बेटा तृ, मै उतानपात का लड़का हूं। मां का नाम सुनीती है, जो दुहागी महल में रहती है। छोटी रानी सरूची रानी यह सुनकर उसको लात मार देते है  और कहती है   मेरी सौतन का लड़का है तू। अगर गददी पर बैठना है तो मेरे गर्भ से जन्म ले। धु्रव कहता है राज लेंगे तो भगवान से लेंगे, पांच साल का धु्रव चल पड़ता है।जंगल में नारद जी मिलता है, मंञ बताता है ओम भगवते वासु देवायनम: पांच वर्ष की उम्र से इतनी तपस्या की। कि बाद में धु्र्रव से धुव भक्त कहलाया है।  इस मौके पर गांव के सरपंच सदींप, समाजसेवी यतनपाल, मुख्याध्यापक सतीश, मुख्य कलाकार विकास सैनी, राजींद्र राणा, याचिका, सरीता,कृष्णा शर्मा,  आदि मुख्य रूप से मौजूद रहें।

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