HARYANA SAFIDON VS NEWS INDIA

देश का सबसे बड़ा ग्रंथ है भारतीय संविधान: सुनील गहलावत

VS News India | Sanjay Kumar | Safidon : – खंड के गांव रत्ताखेड़ा में ग्रामीणों द्वारा संविधान रचेता डॉक्टर भीमराव अंबेडकर जयंती पर एक कार्यक्रम आयोजित किया गया। जहां भंडारे के साथ-साथ एक मेडिकल चेकअप कैंपल भी लगाया गया। कार्यक्रम में मुख्यातिथि के रूप में आरपीआई राष्ट्रीय प्रवक्ता सुनील गहलावत ने शिरकत की। सर्वप्रथम कार्यक्रम में सविधान निर्माता को डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित किए गए। सुनील गहलावत ने अपने संबोधन में कहा कि 14 अप्रैल को बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती भारत ही नहीं पूरे विश्व में मनाई जाती है। इस दिन साल 1891 को मध्य प्रदेश के महू के एक गांव में भीमराव अंबेडकर का जन्म हुआ था। अब की बार पूरा विश्व 131 वां जन्म उत्सव मना रहा है। गहलावत ने कहा कि बचपन से ही उन्हें आर्थिक और सामाजिक भेदभाव का सामना करना पड़ा। स्कूल में छुआछूत और जाति-पाति का भेदभाव झेलना पड़ा। विषम परिस्थितियों के बाद भी अंबेडकर ने अपनी पढ़ाई पूरी की। ये उनकी काबलियत और मेहनत का ही परिणाम है कि अंबेडकर ने 32 डिग्री हासिल की।

विदेश से डॉक्टरेट की डिग्री प्राप्त की। इसके बाद भारत में दलित, वंचित और शोषित एवं महिलाओं के उत्थान के लिए काम करना शुरू किया। संविधान सभा के अध्यक्ष बने और आजादी के बाद भारत के संविधान के निर्माण में अभूतपूर्व योगदान दिया। 1947 में अंबेडकर भारत सरकार में प्रथम कानून मंत्री बने और भारत के संविधान निर्माण में एक अहम भूमिका निभाई। उन्होंने 1951 में अपने पद से इस्तीफा दे दिया एवं उन्होंने दलितों व महिलाओं के साथ हो रहे शोषण के कारण 1956 में अपने अनुयायियों के साथ बौद्ध धर्म स्वीकार कर लिया। समता सैनिक दल सामाजिक संगठन, भारतीय बौद्ध महासभा धार्मिक संगठन एवं आरपीआई राजनीतिक संगठन बनाये । 1956 में ही देश ने अपने सपूत डॉ भीमराव अंबेडकर को खो दिया। कार्यक्रम में मुख्य रूप से भीम सिंह, सुभाष चंद ,महावीर सिंह, सुनील,डॉक्टर दिनेश ,अनिल, रामफल, अमित, सरदार गुरजंट सिंह, दीपक रंगा, अर्पित, मास्टर मुकेश रंगा, जितेंद्र सिंहमार, माया, भतेरी, पूनम व अन्य गणमान्य ग्रामवासी युवाओं ने भाग लिया।

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