अपनी मांगों को लेकर एसडीएम कार्यालय में रोष प्रकट करते हुए गाडिय़ा लुहार परिवार।  
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दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर बेघर 150 गाडिय़ा लुहार परिवार, एसडीएम कार्यालय में मांगों को लेकर किया प्रदर्शन

VS News India | Reporter – Sanju | Safidon : – 100 गज के प्लाट और पेंशन बनवाने के लिए सफीदों के गाडिय़ां लुहारों ने सोमवार को एसडीएम कार्यालय में रोष प्रकट किया। दर्जनों गाडियां लुहार स्थानीय उपमंडल अधिकारी को ज्ञापन सौंपे गए थे। लेकिन उन्हें एसडीएम मनदीप कुमार कार्यालय में नहीं मिले। इस दौरान उन्होंने प्रदर्शन करने के बाद वापिस लौटना पड़ा। प्रदर्शनकारी भीरा, प्रेम, भारत व वजीर आदि ने बताया कि करीब 150 परिवार बेघर होकर दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं। गाडिय़ा लुहार परिवारों का राजनीतिक प्रयोग करने के लिए वोट तो बनाई गई है। लेकिन उनको ना तो राशन कार्ड दिया गया और ना ही आधार कार्ड का लाभ उठाने की प्रक्रिया दी गई है। बुजुर्ग होने पर भी पेंशन का कोई लाभ दिया गया है? उन्होंने कहा कि वे कही-कही कुछ समय के लिए लिए डेरा जमाकर लोहे का कुछ सामान बनाकर उसे बेचने को दर-दर भटकते है। पिछले दशक भर से सफीदों की एक अवैध कालोनी के निजी प्लाटों में अस्थाई रूप से बसे हैं। उनके बच्चे पढऩे की बजाय गंदगी भरे माहौल से कूड़ा बीनकर अपना जेब खर्च चलाते हैं। उनका कहना है कि उनके पास कोई कारोबार नहीं है। उनके पास ना कोई शौचालय है और मजबूरन उनकी बहन-बेटियों तक को खुले में शौच जाना पड़ता है। इस समाज के बुजुर्गों का कहना था कि उनकी तो जिंदगी किसी तरह से कट गई, लेकिन उन्हें अब अपने बच्चों के भविष्य की चिंता सता रही है।  राजनीतिक लोग चुनावों में उनके पास वोट लेने तो आ जाते हैं, लेकिन बाद में उनको कोई नहीं संभ्भालता। वे दर-दर की ठोकरें ख्खाकर थक चुके हैं और वे अब दो खाट बिछाने की जगह चाहते हैं, ताकि वे स्थाई रूप से रह सके। 8वीं पास युवा भीम राणा ने कहा कि वह आगे पढऩा चाहता था। लेकिन स्थाई निवास ना होने, सुविधाएं ना होने व पारिवारिक परिस्थितियों के चलते वह आगे पढ़ नहीं पाया। खेलों में भी वह मेडल प्राप्त कर चुका है। वह चाहता है कि उनका समाज भी समाज के अन्य ख्वर्गों की तरह से मुख्यधारा में शामिल हो सके। उन्होंने बताया कि उनके द्वारा स्थाई निवास के लिए कई बार आवेदन किया। लेकिन सरकार की ओर से कोई भी सुनवाई नहीं हुई।
शत प्रतिशत अनपढ़ भीरा, प्रेम, भारत व वजीर ठिकानों पर प्लाट मालिकों का प्लाट खाली करने का दबाव बढ़ गया है। जिनके प्लाटों मे वे बसे हैं और ऐसे में उन्होने जींद के डीसी को रिहायशी प्लाट आबंटित करने को लिखित अनुरोध भेजा है और उन्हें उ मीद है कि
उनकी मांग को जिला प्रशासन जरूर पूरी करेगा।

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