सफीदों में बीईओ डा.नरेश वर्मा व राजेश वरिष्ठ के साथ सम्मानित होने वाले बच्चे
HARYANA KHAS KHABAR SAFIDON Sports VS NEWS INDIA

राजकीय स्कूल के 15 बच्चें दिल्ली में नेशनल गोल्डन एरो अवार्ड से होगे सम्मानित

VS News India | Reporter – Sanjay Kumar | Safidon : – सफीदों: कस्बे की रविदास बस्ती में स्थित राजकीय प्राथमिक पाठशाला के 15 बच्चें दिल्ली में नेशनल गोल्डन एरो अवार्ड से सम्मानित होगे।  जोकि नई दिल्ली में राष्ट्रीय मुख्यालय में 19 से 23 जनवरी तक आयोजित होने वाले कब बुलबुल उत्सव में सम्मानित किए जाऐंगे।  जिन्हें नेशनल प्रेजीडेंट अनिल जैन, नेशनल चीफ  कमिश्नर केके खंडेलवाल राष्ट्रीय स्तर का सर्टिर्फिकेट देकर सम्मानित करेंगे। शुक्रवार को  खंड शिक्षा अधिकारी डॉ नरेश वर्मा ने राजकीय प्राथमिक स्कूल सफीदों के छोटे-छोटे कब बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि मन में कुछ करने का जनून हो तो कोई भी काम बड़ी आसानी से किया जा सकता है।  इसका सबसे बड़ा उदहारण कब बुलबुल के जिला संगठन आयुक्त राजेश वशिष्ठ को जाता है। जिसने जींद की कब बुलबुल गतिविधियों को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई। अगर हरियाणा की बात करे तो 423 बच्चों इन गतिविविधयों में सामिल हुए थे। जिनमें जींद जिले से 160 बच्चों से 141 बच्चों ने अच्छा प्रदर्शन किया है। जिसमें सबसे अधिक बच्चे सफीदों के एक स्कूल के शामिल है।  एक बार फिर से शिक्षा विभाग ओर स्काउटिंग का नाम रोशन किया गया । जिला संगठन आयुक्त राजेश वशिष्ठ ने बताया की जिसका गोल्डन एरो अवार्ड में चयन हुआ पिछले 12 वर्षों से लगातार राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना चुके। जींद जिले के कब बुलबुल बच्चों की गतिविधियों को देखने के लिए साउदी अरब की टीम दो बार जींद का दौरा लगा चुकी। साउदी अरब के सभी सदस्यों ने भी काफी सराहना की थी। राजेश वशिष्ठ ने जिले के सभी कब मास्टर व फ्लोक लीडर को बधाई दी। जिनके प्रयासों से एक बार फिर से जिला जींद ने प्रथम स्थान हासिल किया। 
क्या है कब बुलबुल:-
 जिला संगठन आयुक्त राजेश वशिष्ठ ने बताया कि प्राथमिक कक्षाओं के छोटे-छोटे बच्चों को खेल-खेल में शिक्षा देने के उद्देश्य से विभिन्न गतिविधियों का आयोजन करवाया जाता है। इन छोटे-छोटे बच्चों को कब बुलबुल के नाम से जाना जाता है। लडकों को कब ओर लड़कियों को बुलबुल का नाम दिया गया है। कब बच्चों की गतिविधियां मोगली की कहानी पर आधारित होती है। जिसमे छोटे-छोटे खेल होते है। खेलों के द्वारा बच्चों को रोचक तरीके से बिना किसी भय के खुशनुमा वातावरण में शिक्षा देना है। बुलबुल बच्चों को तारा स्टोरी से पक्षियों के जैसे तोता-मैना,कोयल आदि के खेल एक हानियां , स्वयम करके सीखने की क्रिया पर बल दिया जाता है।
कब बुलबुल बच्चे पहली से पांचवी कक्षा के होते है । इनको प्रथम चरण से चतुर्थ चरण का पाठ्यक्रम खेल-खेल में करवाया जाता है । स्वामी विवेकानंद ने भी बच्चों को बिना डर के शांत माहोल में शिक्षा देने की बात कहा है। चारों चरणों का पाठ्यक्रम के उपरांत बच्चों को राज्य स्तर पर एक टेस्ट देना होता है। जिसमे राष्ट्रीय स्तर के अवार्ड की चयन प्रक्रिया होती है। प्राथमिक कक्षाओं के बच्चों को मिलने वाला यह उच्च स्तर का अवार्ड गोल्डन एरो अवार्ड होता है। उनका हमेशा यही प्रयास रहा है की बच्चों की झिझक को ख़त्म करके उनको राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा को दिखाने का अवसर प्रदान करवाए, ताकि उनको स्वयं करके सीखने में मदद मिले। कब बुलबुल बच्चों का उद्देश्य होता है कोशिश करो। उनकी भी यही कोशिश है की सभी बच्चे अच्छे काम को करने की कोशिश करे । कब बुलबुल बच्चे दिन में एक भलाई का कार्य करते है। कब बुलबुल बच्चे दो नियमो की पालना करते है। पहला नियम कब बड़ों की आज्ञा मानता है। दूसरा कब स्वच्छ ओर विनम्र होता है। बच्चों को संस्कारी बनाने के लिए इस प्रकार की गतिविधियों का होना अति आवश्यक है। आज स्कूल ओर समाज में नैतिक मूल्यों का पतन हो रहा है, लेकिन इस प्रकार की गतिविधियां बच्चों को अपने ओर समाज के प्रति जागरूक बनाने का कार्य करती है।

542
Spread the love

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *