सरकार किसान व आढ़ती के अटूट रिश्ते को तोडऩे पर आमादा - अभय चौटाला
HARYANA SAFIDON VS NEWS INDIA

सरकार किसान व आढ़ती के अटूट रिश्ते को तोडऩे पर आमादा: अभय चौटाला 

VS News India | Reporter – Sanju | Safidon : – वरिष्ठ इनैलो नेता एवं विधायक अभय सिंह चौटाला ने देर सांय नगर की नई अनाज मंडी में आढ़तियों के बीच पहुंचकर उनकी हड़ताल का समर्थन किया। इस मौके पर कच्चा आढ़ती संघ के प्रधान अनुज मंगला ने विधायक अभय सिंह चौटाला का उनके समर्थन के लिए धन्यवाद किया। आढ़तियों को संबोधित करते हुए अभय सिंह चौटाला ने कहा कि किसान व आढ़तियों का जो वर्षों पुराना रिश्ता है और उस रिश्ते को हरियाणा सरकार खत्म करने पर आमादा है। आज किसान सरसों की फसल बेचने के लिए दर-दर भटक रहे हैं। पहली बार यह देखने को मिल रहा है कि गेहूं की फसल में भी नमी को चेक किया जा रहा है और नमी बताकर के गेहूं की फसल नहीं खरीदी जाती। इनैलो सरकार में किसान का एक-एक दाना खरीदा जाता था। हरियाणा प्रदेश चौ. देवीलाल द्वारा सिंचा गया प्रदेश है और इनैलो चौ. देवीलाल की नीतियों पर चलने वाली पार्टी है। चौ. देवीलाल कभी किसान व कमेरे वर्ग की लड़ाई के लिए पीछे नहीं हटे। उन्ही की नीतियों का अनुशरण करते हुए वे सफीदों मंडी में आढ़तियों, किसानों व मजदूरों से मिलने के लिए पहुंचे हैंं। उन्होंने कहा कि प्रदेश का आढ़ती, किसान व मजदूर जहां पर उनकी व पार्टी की ड्यूटी लगाएंगे वे हरदम खड़े मिलेंगे। उन्होंने कहा कि पूरी इनैलो पार्टी व इसका हर कार्यकर्ता आढ़तियों व किसानों के साथ खड़ा है। आढ़ती व किसान का तो चोली दामन का साथ है और किसान के लिए तो आढ़ती ए.टी.एम. के समान है। किसान को अगर आधी रात को भी पैसे की जरूरत पड़ती है तो वह मंडी में आकर आढ़ती का दरवाजा खटखटा देता है और आढ़ती भी नि:संकोज हर समय उसकी आर्थिक जरूरतों को पूरा करता है। उन्होंने कहा कि सरकार में बैठे हुए नेता और अधिकारी जिनको खेती-किसानी का कोई ज्ञान नहीं है, वे ही लोग किसानों व आढ़तियों के लिए नीतियां बनाते हैं जिनका धरातल से कोई लेना देना नहीं है। ऐसी नीतियों के कारण ही आज प्रदेश भर में किसानों व आढ़तियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वे इस मामले में जल्द ही सी.एम. से मिलकर पुरानी पद्धति के अनुसार ही गेहूं-सरसों खरीद का कार्य आरंभ करवाने की बात करेंगे ताकि किसानों व आढ़तियों का भाईचारा कायम रह सके। उन्होंने सरकार से मांग की कि आढ़तियों, किसानों व मजदूरों को परेशान न किया जाए और पुरानी पद्ध़ति के अनुसार ही गेहूं व सरसों खरीदी जाए। 

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