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योग साधना करवाकर प्रवासियों को किया जा रहा है तनावमुक्त 

VS News India | Reporter – Sanju | Safidon : – नगर के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में ठहरे प्रवासी लोगों को योग साधना के माध्यम से तनावमुक्त किया जा रहा है। गौरतलब है कि करोनाकाल के दौरान पंजाब के मोगा व हरियाणा के निगदू से साइकिलों पर अपने घर उत्तर प्रदेश के लिए निकले थे लेकिन प्रशासन ने इन्हे सफीदों पहुंचते ही यहां कि राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में ठहरा दिया था। पिछले काफी दिनों से ये 46 प्रवासी लोग इसी सेफ हाउस में ठहरे हुए है। सबसे अहम बात यह है कि इनमें से ज्यादातर लोग पढ़े-लिखे हैं लेकिन बेरोजगारी के चलते मजदूरी व माली का काम करते हैं। इन मजदूर प्रवासियों की देखभाल में प्रशासन की ओर से एस.डी.एम. मनदीप कुमार, खंड शिक्षा अधिकारी डा. नरेश वर्मा व इस विद्यालय के प्रिंसिपल डा. चंद्रभान निरंतर प्रयासरत्त हैं। इन मजदूरों को निरंतर अपने परिवार व घर की चिंताएं सता रही है और वे कई बार प्रशासन से घर भेजने की अनुमति की गुहार लगा चुके है लेकिन कोरोना महामारी के परिस्थितियों के चलते उन्हे घर जाने की अनुमति दिया जाना संभव नहीं है। खंड शिक्षा अधिकारी डा. नरेश वर्मा ने बताया कि इन सभी लोगों को पिछले सप्ताह भर से लगातार सुबह 2 घंटे योग साधना भी करवाई जाती है ताकि इन्हें किसी भी तरह का तनाव आदि ना रहे। पतंजलि योग समिति की योगगुरु बहन संतोष व सुदेश हर रोज सुबह इन प्रवासियों को योग साधना करवाती है। डा. वर्मा ने बताया कि योग शिविर वाले स्थान को योगिक क्रियाओं करने से पूर्व अच्छी तरह से सैनिटाइज भी किया जाता है। योगगुरु संतोष आर्या ने बताया कि इन लोगों में से जो भी सही ढंग से योग कर रहे हैं उन्हें प्रोत्साहन के तौर पर पतंजलि योग संस्थान की ओर से सर्टिफिकेट भी प्रदान किया जाएगा। उन्होंने बताया कि सभी प्रवासी बहुत अच्छी तरह से योग कर रहे हैं और इन सभी का बर्ताव भी बहुत ही बढिय़ा है।
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प्रवासियों ने दिया अपने हुनर का परिचय
सफीदों के राजकीय स्कूल में ठहरे इन प्रवासियों ने यहां पर रहकर अपने हुनर का भी परिचय दिया है। बता दें कि ये सभी प्रवासी अच्छे पढ़े-लिखे होने के साथ-साथ माली के कार्य के हुनरमंद भी हैं। कई दिन यहां रहते-रहते उनका मन नहीं लग रहा था और उन्हे रह-रहकर अपने घर व परिवार की यादें सता रही थी। इन्होंने स्वेच्छा से अपने हुनर के माध्यम से समय का सदुपयोग करने व जिस स्थान पर वे रह रहे है उसे साफ-सुथरा करने का निर्णय लिया। लॉकडाऊन में स्कूल बंद होने के कारण यहां की सफाई व्यवस्था चरमरा गई थी और चारों ओर घास उग आई थी। वहीं रखरखाव के अभाव में स्कूल के पौधे भी मुरझाने लगे थे। इन मजदूरों ने स्वेच्छा से स्कूल के साफ-सफाई करने के साथ-साथ पेड़-पौधों की नलाई व गुडाई की। वहीं पेड़-पौधों में पानी दिया। इन प्रवासियों के प्रयासों से स्कूल परिसर फिर से हराभरा, साफ-सुथरा व फूलों की सुगंध से महक गया है। प्रवासियों का कहना है कि इंसान जहां पर जिस भी परिस्थिति में रहता है वह साफ-सुथरा अवश्य होना चाहिए। इसी मकसद से स्वेच्छा से उन्होंने यह कार्य किया है और उन्हे आत्मिक शांति का अनुभव हुआ है।

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