सफीदों में मनाई पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती रजाना
DHARM HARYANA KHAS KHABAR SAFIDON VS NEWS INDIA

सफीदों में मनाई पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती : रजाना

VS News India | Reporter – Sanju | Safidon : – युवा भाजपा नेता जसमेर रजाना ने सफीदों विधानसभा के गॉव सिल्लाखेड़ी में बुथ नंबर 81 व 82 पर पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती मनाई।
रजाना ने ग्रामवासियों को सम्बोधित करते हुए पंडित दीनदयाल उपाध्याय के जीवन पर प्रकाश डालते हुए बताया कि उनका जन्म 25 सितंबर 1916 को मथुरा (उत्तरप्रदेश)के चंदरभान गॉव में हुआ।उनकी माता का नाम रामप्यारी व उनके पिता का नाम श्री भगवती प्रसाद उपाध्यक्ष था। छोटी उम्र से ही संघर्षों भरा जीवन जीते दीनदयाल समाज के लिए एक मिसाल थे।उनके दादा एक पौराणिक ज्योतिषी थे।उनके पिता जलेसर में सहायक स्टेशन मास्टर थे।उनकी माता धार्मिक रीतिरिवाज को मानने वाली महिला थी।इनके परिवार में उनसे 2 साल छोटे भाई थे। साल 1918 में जब उनकी पिता की मृत्यु हुई तब दीनदयाल की उम्र केवल ढाई साल थी।जिससे उसके परिवार का भरण पोषण बन्द हो गया था।तब उनके नाना ने उनके परिवार को संभाला।उनका ननिहाल फतेहपुर सीकरी के पास गुड़ की मंडी का था। जब वे 10 वर्ष के थे उनके नाना का देहांत हो गया।उनके छोटे भाई शिवदयाल ही उनका सहारा था पर एक गम्भीर बीमारी के चलते 18 नवम्बर 1934 में उनका भी देहांत हो गया। पर दीनदयाल अकेले रह गए उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी करने का फैसला किया। उन्होंने स्कूली शिक्षा सीकर के हाई स्कूल से , इंटरमीडिएट शिक्षा पिलानी के जीडी बिड़ला कॉलेज,बी ए स्नातक धर्म कॉलेज कानपुर से व एम ए सेंट जोन्स कॉलेज आगरा से अपनी पढ़ाई पूरी नही की क्योकि बीच मे उनकी बहन का देहांत हो गया।उसके बाद सिविल सेवा की परीक्षा उतीर्ण की पर उनकी रुचि आम जनता के लिए सेवा के प्रति अधिक थी इसलिए उन्होंने नोकरी नही की।
रजाना ने आगे बताया कि दीनदयाल एक समाज सेवक थे 1937 में अपने दोस्त बलवन्त महासब्डे के माध्यम से राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ में शामिल हुए।उन्होंने राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के संस्थापक केबी हेडगेवार से मुलाकात की और खुद को पूरी तरह संग़ठन को समर्पित करने का फैसला लिया।सन 1942 में पूरे समय संघ के साथ जुड़कर काम करने लगे।उन्होंने संघ शिक्षा प्रशिक्षण के लिए नागपुर में 40 दिन के ग्रीष्मकालीन आर एस एस शिविर में भाग लिया। सन 1955 में उत्तरप्रदेश के लखीमपुर जिले में प्रचारक के रूप में काम किया।सन 1951 में भारतीय जनसंघ का निर्माण डॉ श्यामा प्रशाद मुखर्जी ने किया।डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी दीनदयाल की बुद्धिमता व विचारधारा से बहुत प्रभावित थे। उन्होंने उनके लिए कहा कि “अगर मेरे पास दो दीनदयाल होते तो ,मैं भारत की राजनीति का चेहरा बदल देता” किंतु 1953 में डॉ श्यामा प्रशाद की मृत्यु हो गयी। संघ की पूरी जिम्मेवारी दीनदयाल पर आ गयी।यह भारत की मजबूत राजनीति बन गयी और दीनदयाल इस पार्टी के अध्यक्ष बने।दीनदयाल व्यक्तिगत जीवन मे बहुत ही साधारण व्यक्ति थे वे धोती ,कुर्ता व सिर पर टोपी पहनते थे।वर्तमान में यही भारतीय जनसंघ को भारतीय जनता पार्टी के नाम से जाना जाता है।दीनदयाल एक राजनेता के साथ एक लेखक भी थे आजादी से पहले उन्होंने लखनऊ में एक मासिक पत्रिका “राष्ट्रधर्म” का प्रकाशन किया।इसके साथ साथ उन्होंने साप्ताहिक समाचार पत्र पंचजन्य, दैनिक समाचार पत्र स्वदेश आदि अनेको लेख प्रकाशित किये।दीनदयाल जी मानवतावाद को अधिक बढ़ावा देते थे।
रजाना ने बताया कि दीनदयाल केवल 43 दिन ही जनसंघ पार्टी के अध्यक्ष रहे। 44 वें दिन यानी 11 फरवरी 1968 की सुबह उन्हें मुगल सराय रेलवे स्टेशन के पास मृत पाया गया।सन 2016 में बीजेपी सरकार ने कई सार्वजनिक स्थानों व दिल्ही में इनके नाम पर एक सड़क मार्ग भी है।2017 में बीजेपी उत्तरप्रदेश सरकार ने मुगलसराय स्टेशन का नाम दीनदयाल रखने का काम किया क्योंकि उनका मृत शरीर इस स्टेशन पर ही पाया गया था। रजाना ने बताया कि इस प्रकार उनका पूरा जीवन संघर्षों से गुजरा।

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