नौनिहालों का भविष्य संवारना गुरूजनों का दायित्व-जिलाधिकारी
Shravasti

नौनिहालों का भविष्य संवारना गुरूजनों का दायित्व-जिलाधिकारी

VS News India | Vinay Balmiki | Shravasti : – श्रावस्ती । गुरूजनों के उपर समाज का जो विश्वास है उस विश्वास को कायम रखने के लिए अब गुरूजनों को चुनौतीपूर्ण रूप से लेना होगा और यह भी ध्यान रखना होगा कि उनके विद्यालय के आस-पास गावों में कोई भी बच्चा शिक्षा के उजियारे से वंचित न रहने पावे। जिस विश्वास के साथ अभिभावक अपने अबोध बच्चे को गुरूजनों को भविष्य संवारने के लिए संवारते है उस विश्वास पर खरे उतरना गुरूजनों का फर्ज बनता है कि उन अबोध कच्चे घड़े को तरास कर उनका भविष्य संवारे ताकि वे उच्च पदों पर आसीन हो सके और अपने परिवार के साथ-साथ समाज और देश का नाम रोशन कर सके। उक्त विचार कलेक्ट्रेट तथागतहाल में आयोजित शिक्षकों की कार्यशाला को सम्बोधित करते हुए जिलाधिकारी ओ0पी0 आर्य ने दिया है। उन्होने जोर देते हुए कहा कि यंहा पर शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में कार्य करने की अपार संभावनाएं है इस लिए गुरूजन अपनी व्यक्तिगत रूचि लेकर अपनी सहभागिता निभा कर जिले के विभाग में अपना नाम दर्ज करायें। जिलाधिकारी ने कहा कि बच्चों में शैक्षिक गुणवत्ता संवर्धन हेतु स्तरानुकूल कक्षा-शिक्षण पर बल दिया जाये एवं बच्चों के ज्ञानात्मक स्तर के आधार पर उनके साथ कक्षा शिक्षा का कार्य सम्पादित किया जाये। नया सत्र शुरू होने से ठीक पहले तक अभियान चलाना ज्यादा कारगर साबित हो सकता है। स्कूल चलो अभियान में परिषदीय शिक्षक-शिक्षिकाओं के साथ ही सभी को अपनी जिम्मेदारी निभानी है।जिलाधिकारी ने गुरूजनों को निर्देश दिया कि हर गांव एवं मुहल्ले में छह से 14 साल के ऐसे बच्चों को चिन्हित कर सूचीबद्ध किया जाना है, जिनके स्कूलों में दाखिले नहीं हैं। चिन्हित किए जाने वाले सभी बच्चों के अभिभावकों को बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम की जानकारी देकर उन्हें अपने बच्चों के नाम स्कूलों में पंजीकृत कराने के लिए प्रेरित किया जाएगा। आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां इस बात की जानकारी मुहैया कराएंगी कि उनके केंद्रों पर पिछले वर्षो के दौरान पांच साल की आयु वाले कितने बच्चे पंजीकृत थे। इसी के आधार पर उन बच्चों को खोजा जाए।जिलाधिकारी ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को निर्देश दिया कि परिषदीय स्कूलों में छह से 14 साल तक के बच्चों का शत-प्रतिशत नामांकन कराना होगा। शिक्षकों की उपस्थिति, शैक्षिक गुणवत्ता एवं मासिक कलेंडर के अनुसार विद्यालयों में पठन-पाठन की व्यवस्था कराई जाए। उन्होने कहा कि यंहा पर शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में कार्य करने की अपार संभावनायें हैं इसलिए अब हर शिक्षक का दायित्व बनता है कि वे सरकार द्वारा सौंपी गई जिम्मेदारियों को बाखूबी निभावें और बच्चों कों बेहतर शिक्षा देकर शिक्षा के स्तर को उपर उठाने में अपनी महती भूमिका निभावें।कार्यक्रम का संचालन जिला समन्वयक सर्व शिक्षा अभियान अजीत उपाध्याय ने किया। इस अवसर पर समस्त खण्ड शिक्षा अधिकारी सहित गुरूजन उपस्थित रहे।

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