गीताजंली कंसल को पुरस्कृत करते हुए ऊषा मुआल, राजकुमार गोयल व राजकुमार भोला व अन्य।
HARYANA KHAS KHABAR SAFIDON VS NEWS INDIA

महिला सशक्तिकरण के लिए सफीदों की दिव्यांग गीताजंली कंसल सम्मानित

VS News India | Reporter – Sanju | Safidon : – महिला सशक्तिकरण को समर्पित एवं सफीदों क्षेत्र की लाड़ो दिव्यांग गीताजंली कंसल को अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा जींद के सर छोटूराम किसान कालेज के ऑडिटोरियम में आयोजित समारोह में पुरस्कृत किया गया। महिलाओं व समाज के प्रति उनकी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए यह पुरस्कार जिला महिला एवं बाल विकास कार्यक्रम अधिकारी ऊषा मुआल, प्रसिद्ध समाजसेवी राजकुमार गोयल व महात्मा गांधी शिक्षण संस्थान के राजकुमार भोला द्वारा प्रदान किया गया। गीताजंली कंसल के सम्मानित होने को लेकर सफीदों क्षेत्र व परिवार के लोगों में खुशी का माहौल है और गीताजंली के निवास पर बधाई देने वालों को तांता लगा हुआ है। बता दें कि शारीरिक रूप से गीताजंली कंसल भले ही अक्षम हो लेकिन दिल व दीमाग से वे कहीं से भी अक्षम नहीं है और हर रोज वे हौसलों की उड़ान भरती हैं। इसी हौसले व जज्बे को लेकर सफीदों क्षेत्र के लोगों को अपनी लाड़ों गीताजंली कंसल पर नाज है और उसकी तरक्की की दिल से दिन-रात कामना करता है। सफीदों की गीतांजली कंसल उन लड़कियों में से है जिसने जीवन में मुश्किलों को नहीं बल्कि सिर्फ और सिर्फ लक्ष्य को देखा है और उस लक्ष्य पर विजय भी हासिल की है। दोनों पैरों से चलने में असमर्थ होने के बावजूद भी वह किसी पर बोझ बनकर नहीं रही। हिंदी व इंग्लिश में एम.ए. शिक्षित गीतांजली कंसल ने शिक्षा ग्रहण करने के साथ-साथ टेडीबेयर बनाना, पेंटिंग करना, मेहंदी लगाना, कपड़े सिलाई, कढ़ाई करना व समय निकालकर बच्चों को ट्यूशन पढ़ाना जैसे सभी कार्यों को स्वयं करती है। गौरतलब है कि गीतांजलि कंसल आज किसी परिचय की मोहताज नहीं है और शिक्षा व समाजसेवा के क्षेत्र में नित नए मुकाम हासिल किए हैं। सदैव कर्म में विश्वास रखने वाली संघर्षशील व्यक्तित्व की धनी गीतांजली कंसल द्वारा लगाई जाने वाली मेहंदी पुरे हरियाणा भर मे मशहूर है। सफीदों क्षेत्र की हर लड़की का सपना होता है जब वो दुल्हन बने तो उसके हाथो पर मेहंदी गीतांजलि के हाथों से ही लगे। गीतांजलि ने इस कला को बढ़ावा देने के लिए इन्होंने अपने घर पर भी नि:शुल्क गीतांजली मेहंदी आर्ट गु्रप के नाम से मेहंदी प्रशिक्षण केंद्र खोला हुआ है। गीतांजलि में हर प्रकार की पेंटिंग, नेल आर्ट, ड्रॉईंग, आर्ट क्राफ्ट आदि प्रतिभा विद्यमान है और इस विद्या को आगे बढ़ाने के लिए आने वाली पीढ़ी को नि:शुल्क प्रशिक्षण दे रही है। गीतांजलि ने सफीदों नगर की लगभग 200 महिलाओं का एक समूह बनाया हुआ है। यह समूह हर प्रकार के सामाजिक कार्यों में सदैव अग्रणी रहता है। गरीब कन्या के विवाह मे जरूरत का सामान मुहैया करवाना, गरीब बच्चो की पढ़ाई-लिखाई के लिए सामान प्रदान करवाना, जरूरतमंद महिलाओं को रोजगार देकर स्वावलंबी बनाने के लिए उनको सिलाई मशीन उपलब्ध करवाना इस समूह के मुख्य कार्य हैं। गीताजंलि कंसल को सफीदों प्रशासन द्वारा राजकीय सम्मान, हरियाणा के महामहिम राज्यपाल द्वारा नारी शक्ति सम्मान व जूनियर चैम्बर इंटरनेशनल के राष्ट्रीय अध्यक्ष द्वारा पूरे जोन मे श्रेष्ठ चेयरपर्सन सम्मान के अलावा बड़े-बड़े सम्मानों से नवाजा जा चुका है। उल्लेखनीय है कि गीतांजली का जन्म जींद जिले के सफीदों में हुआ, जब जन्म हुआ तो सब ठीक था पर गीतांजलि जब 9 महीने तो डॉक्टर की लापरवाही के कारण गीतांजलि को पोलियो हो गया, जिसकी वजह से गीतांजलि में अपने पैरों की जान खो दी लेकिन आज उनको देखकर लगता है उन्होंने उस पोलियो और भगवन को ही चुनौती दे डाली है। इतना सब होने के बाद जहां इंसान जीने की आश छोड़ देता है, वहीं उन्होंने अपनी इस कमजोरी को अपनी ताक्कत बना लिया और आज वो जिस मुकाम पर है वह कोई अच्छा व्यक्ति भी आसानी से नहीं पहुंच सकता है। ऐसी हिम्मत वाली गीतांजलि कंसल आज हरियाणा की हर लड़की व संपूर्ण समाज के लिए प्रेरणास्त्रोत बन गईं हैं। गीतांजली कंसल कहती हैं कि शारीरिक कमजोरी से इंसान उभर सकता है लेकिन विचारों की कमजोरी मनुष्य को कभी भी आगे बढऩे नहीं देती। वैचारिक रूप से कमजोर व्यक्ति ही सहीं मायनों में निशक्त होता है। गीताजंली ने लोगों से आह्वान किया कि वे बेटा- बेटी में कोई फर्क महसूस न करें। बेटियों को भी आगे बढऩे के बराबर अवसर उपलब्ध करवाएं। बेटियां किसी भी क्षेत्र में बेटों से कम नहीं है।

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