ऑस्ट्रेलिया में कोरड़ो से एक देवर को घेरे हुए तीन भाभियां।
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ऑस्ट्रेलिया में भी हुई हरियाणवीं फाग की मस्ती में कोरडों की बोछार

VS News India : – फाग व होली का नाम आते ही आंखों के आगे रंग और कोरडे आ जाते हैं। हमारे तीज त्योहारों का रंग भले ही हरियाणा में फीका पड़ रहा हो, लेकिन विदेशों में बसे हरियाणवीं परिवार हमारी संस्कृति को संजोए रखने के लिए परस्पर प्रयासों में लगे हुए हैं। एसोसिएशन ऑफ हरियाणवीज इन ऑस्ट्रेलिया (एएचए) द्वारा रविवार को ऑस्ट्रेलिया के विभिन्न शहरों में हरियाणवी फाग मेले का आयोजन किया गया। सिडनी, एडिलेड एवं मेलबर्न में आयोजित इस मेले में एक हजार से अधिक हरियाणवी परिवारों के साथ भारत के अन्य प्रांतों के लोग भी मौजूद रहे।  

फाग खेल रहे लोगों की मानें तो रंग और गुलाल की बौछारों से पूरा वातावरण होली-फाग के त्यौहार की खुशी में सराबोर हो गया इस मौके पर देवर-भाभी के बीच ताबड़तोड़ कोरङ़ो का खेल विशेष आकर्षण रहा। जहां एक तरफ देवर अपनी भाभियों को चुनौती देते नजर आए, वहीं दूसरी तरफ भाभी कोरङो से उनकी चुनौतियों को नाकाम करने में लगी थी।

इसी के साथ छोटे-छोटे बच्चों के जोश और उमंग से लबालब वातावरण का भी अद्भुत दृश्य देखने लायक था। मेले में उपस्थित लोग हरियाणवी गानों और होली के गीतों के साथ-साथ ढोल की धुन पर भी खूब झूमते नजर आए। एएचए टीम के एडिलेड चैप्टर के अध्यक्ष अशोक कुंडू ने अमर उजाला के संवाददाता से बात करते हुए बताया कि होली-फाग हरियाणवीयों के सबसे प्रिय त्योहारों में से एक है। इसलिए इस पर्व का आयोजन ऑस्ट्रेलिया में उनके द्वारा पिछले कई वर्षांे से बड़े ही हर्षोल्लास के साथ किया जाता है।

ऑस्ट्रेलिया में आयोजित इस फाग मेले के राष्ट्रीय संयोजक राजीव गुप्ता ने सिडनी ने बताया कि इस मेले के सफल आयोजन में रविंद्र वर्मा, संजीव दलाल, सुनील अहलावत, पूनम सिंह, तरुणा सिंह, विजयपाल रेढू, सतीश खत्री, अमन बूरा, नवनीत, मंदीप सहारण,सचिन दूहन,प्रवीण चौधरी, प्रियंका गुप्ता,रविंदर घनघस,पंकज मित्तल,कपिल शर्मा, विभोर शर्मा, मनोज रूहिल व अजय ढूल का बहुत सहयोग रहा। ऑस्ट्रेलिया में पढ़ाई करने गई निशा ने बताया कि इस प्रकार के आयोजन का हिस्सा बनकर वह बहुत खुश है। वहीं एक अन्य विद्यार्थी राहुल राणा बताते हैं कि अपने गांव गलियारों जैसा माहौल देखकर उनकी पुरानी यादें ताजा हो गई। उन्होंने बताया कि इस संस्था की स्थापना का मूल उद्देश्य यह है कि ऑस्ट्रेलिया में रह रहे हरियाणवी समुदाय के सभी परिवारों को एक साथ जोड़ कर आगे बढ़ा जाए, जिससे कि हम हमारी सभ्यता रीति-रिवाज एवं संस्कृति के बारे में आने वाले पीढिय़ों को भी अवगत करा सकें।

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